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मेरी री सास के पांच पुतर थे Folk Song And Lokgeet Lyrics

Nikita - मेरी री सास के पांच पुतर थे Lyrics Folk Song Lyrics



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मेरी री सास के पांच पुतर थे Lyrics


मेरी री सास के पांच पुत्तर थे, मेरी री सास के पांच पुत्तर थे
दो देवर दो जेठ सुणियो, दो देवर दो जेठ सुणियो
मेरे री करम म बावळिया लिख्या था, मेरे री करम म बावळिया लिख्या था
वो भी गया परदेश सुणियो, वो भी गया परदेश सुणियो
बारा री बरस मे बावळिया घर आया, बारा री बरस मे बावळिया घर आया
बरसे मूसलधार सुणियो, बरसे मूसलधार सुणियो
मेरा तो ल्याया घूम घाघरा, मेरा तो ल्याया घूम घाघरा
अपणी ल्याया पतळून सुणियो, अपणी ल्याया पतळून सुणियो
मेरी री सास के पांच पुत्तर थे, मेरी री सास के पांच पुत्तर थे
दो देवर दो जेठ सुणियो, दो देवर दो जेठ सुणियो
सास भी सो गी सुसरा भी सो ग्या, सास भी सो गी सुसरा भी सो ग्या
चौबारे बिछा लेई खाट सुणियो, चौबारे बिछा लेई खाट सुणियो
मैं भी सो गी बावलिया भी सो ग्या, मैं भी सो गी बावलिया भी सो ग्या
घर में बड़ गए चोर सुणियो, घर में बड़ गए चोर सुणियो
मेरी री सास के पांच पुत्तर थे, मेरी री सास के पांच पुत्तर थे
दो देवर दो जेठ सुणियो, दो देवर दो जेठ सुणियो
मेरा तो ले गए घूम घाघरा, मेरा तो ले गए घूम घाघरा
बावळिये की ले गए पतळून सुणियो, बावळिये की ले गए पतळून सुणिये
मैं तो रोई सुबक सुबक कै, मैं तो रोई सुबक सुबक कै
बावळिये ने मारी किळकार सुणियो, बावळिये ने मारी किळकार सुणियो
मेरी री सास के पांच पुत्तर थे, मेरी री सास के पांच पुत्तर थे
दो देवर दो जेठ सुणियो, दो देवर दो जेठ सुणियो
मन्नै तो जगाई अपणी देवराणी जेठाणी, मन्नै तो जगाई अपणी देवराणी जेठाणी
बावळिये ने सारा गाम सुणियो, बावळिये ने सारा गाम सुणियो
मेरी री सास के पांच पुत्तर थे, मेरी री सास के पांच पुत्तर थे
दो देवर दो जेठ सुणियो, दो देवर दो जेठ सुणियो
मेरे री करम म बावळिया लिख्या था, मेरे री करम म बावळिया लिख्या था
वो भी गया परदेश सुणियो, वो भी गया परदेश सुणियो

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